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किसानों को 4 अक्टूबर से वितरित होंगे ऋण माफी एवं रहन मुक्ति प्रमाण पत्र जनजातीय उपयोजना क्षेत्र के किसानों को मिलेगा 60 हजार बीघा भूमि का हक
जयपुर, 3 अक्टूबर। सहकारिता मंत्री श्री अजय सिंह किलक ने बुधवार को बताया कि मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे द्वारा 9 अगस्त को की गई घोषणा की पालना में जनजातीय उपयोजना क्षेत्र के 9 जिलों डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौडगढ़, उदयपुर, राजसमन्द, सिरोही, पाली एवं बारां के पात्र सीमान्त एवं लघु किसानों को 4 अक्टूबर से ऋण माफी एवं रहन मुक्ति प्रमाण पत्र वितरण कार्यक्रम का शुभारम्भ किया जायेगा। उन्होंने बताया कि केन्द्रीय सहकारी बैंकों एवं प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों के पात्र किसानों को शिविरों के माध्यम से प्रमाण पत्र वितरित किये जायेंगे। शिविर केन्द्रीय सहकारी बैंक की संबंधित शाखा पर आयोजित होंगे। उन्होंने बताया कि शिविरों के माध्यम से कृषि ऋण लेने वाले सीमान्त एवं लघु किसानों के अवधिपारों खातों में बकाया समस्त मूलधन, ब्याज एवं शास्ति को पूर्णतया माफ कर ऋण माफी एवं रहन मुक्ति प्रमाण पत्र दिये जायेंगे। श्री किलक ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा से इन जिलों के 12 हजार से अधिक किसानों का लगभग 82 करोड़ रुपये का कृषि ऋण माफ होगा जिसमें से प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक से जुड़े 8 हजार 900 से अधिक किसानों का तथा केन्द्रीय सहकारी बैंक से जुड़े 3 हजार 400 से अधिक किसानों का लगभग 82 करोड़ रुपये का कृषि ऋण माफ होगा। सहकारिता मंत्री ने बताया कि जनजातीय उपयोजना क्षेत्र के किसान कई कारणों से कृषि ऋण नहीं चुका पा रहे थे, ऐसे में उनके खाते अवधिपार की श्रेणी में आ गये थे। तथा ऐसे किसानों की लगभग 60 हजार बीघा जमीन बैंकों के पक्ष में गिरवी रखी हुई थी। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के इस ऐतिहासिक निर्णय से जहां एक ओर ऐसे किसानों के ऋण माफ होने से राहत मिलेगी वही दूसरी ओर बैंकों के पक्ष में रहन रखी भूमि भी किसानों को पुनः मिल सकेगी। रजिस्ट्रार, सहकारिता श्री नीरज के पवन ने बताया कि मुख्य सचिव श्री डी. बी. गुप्ता के द्वारा संबंधित जिला कलक्टरों को योजना के क्रियान्वयन के बारे में पूर्व में ही दिशा निर्देश जारी किये जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि व्यक्तिश सभी 9 जिला कलक्टरों को दूरभाष पर योजना के क्रियान्वयन को लेकर अवगत करा दिया गया है तथा सहकारिता से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को इस बारे में निर्देशित किया जा चुका है। श्री पवन ने बताया कि जो किसान स्थाई रूप से पलायन कर चुके हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है ऐसे पात्र किसान के पास आधार नम्बर, भामाशाह नम्बर एवं मोबाईल नम्बर का होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि यदि ऐसे किसान के पास ये दस्तावेज नहीं है तो उनके द्वारा आधार कार्ड/भामाशाह कार्ड को बनवाने के लिये जारी आईडी नम्बर प्रस्तुत करने पर ऋणमाफी एवं रहन मुक्ति प्रमाण पत्र जारी किया जा सकेगा।
 
 
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