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न्यायालय में पैरवी कर आवंटियों को भूखण्ड का आवंटन किया जाएगा -सहकारिता मंत्री
जयपुर, 9 मार्च। सहकारिता मंत्री श्री अजयसिंह किलक ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में बताया कि जयपुर की मुहाना गृह निर्माण सहकारी समिति के भूखण्ड़ों से संबंधित 25 प्रकरण विभिन्न न्यायालयों में चल रहे है। उन्होंने आश्वस्त किया कि शीघ्र ही न्यायालयों में उक्त प्रकरणों की पैरवी कर निस्तारण का प्रयास किया जाएगा, ताकि लोगों को भूखण्ड के आवंटन हो सके। श्री किलक प्रश्नकाल में विधायकों द्वारा पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। सहकारिता मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि वे स्वयं के स्तर से इस मामले का रिव्यू करेंगे और निरीक्षकों को लगाने की आवश्यकता होगी तो, अगले सप्ताह में नियुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि सकारात्मक सोच के साथ प्रयास कर आवंटियों को जल्द ही भूखण्ड का कब्जा दिया जाएगा। श्री किलक ने बताया कि वर्ष 1992 में सचिवालय कर्मचारी संघ एवं मुहाना गृह निर्माण सहकारी समिति के मध्य एम ओ यू हुआ था जिसमें 100 बीघा जमीन पर पट्टे काटे जाने थे लेकिन कम धन राशि आने से गैर कर्मचारियों को भी वर्ष 1992 में इसमें शामिल किया गया था। उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 में समिति में ऑडिट व निरीक्षण जैसी अनियमितताएं पाये जाने पर तत्कालीन उप रजिस्ट्रार को प्रशासक लगाया गया था। उसके बाद वर्ष 2009 में शिकायत मिलने पर समिति में अवसायन हेतु समापक लगाया गया। इससे पहले विधायक श्री हीरालाल के मूल प्रश्न का जवाब देते हुए श्री किलक ने कहा कि मुहाना गृह निर्माण सहकारी समिति की योजना- सचिवालय नगर का नियमन जयपुर विकास प्राधिकरण में विचाराधीन है। समिति द्वारा मूलतः अपना रिकार्ड 29 सितम्बर, 1999 को जयपुर विकास प्राधिकरण, जयपुर में प्रस्तुत किया गया था। जिसके आधार पर योजना के एक भाग का नियमन केम्प 2 मई, 2003 से 9 मई, 2003 तक आयोजित किया गया। शेष भूखण्डधारियों की समस्याओं हेतु गठित कमेटी की बैठक कार्यवाही विवरण की अनुपालना में 22 जनवरी, 2004 व 17 मई,2004 को शेष रिकार्ड प्रस्तुत किया गया तभी से नियमन की प्रक्रिया विभिन्न चरणों में विचाराधीन है। उन्होंने बताया कि उक्त समिति की सचिवालय नगर विस्तार नाम से कोई योजना नहीं है। वर्तमान में समिति में समापक नियुक्त है। उन्होंने मुहाना गृह निर्माण सहकारी समिति के प्रशासकों की सूची सदन के पटल पर रखी। उन्होंने बताया कि तत्कालीन प्रशासक/अवसायक श्री सुनील कुमार, उप रजिस्ट्रार को राज्य सरकार द्वारा निलम्बित किया गया है तथा वर्तमान में राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियन्त्रण एवं अपील नियम) 1958 के नियम 16 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही र्कामिक विभाग में विचाराधीन है। योजना के नियमन की र्कायवाही विभिन्न न्यायालयों में लंबित लगभग 25 न्यायिक प्रकरणों के निस्तारण पर संभव हो सकेगी। सहकारिता मंत्री ने बताया कि प्रशासक/समापक द्वारा भूमि की जेडीए से 90-बी की र्कायवाही करवाई गई। जिसे संभागीय आयुक्त द्वारा रदद् किया गया। उक्त 90-बी की कार्यवाही को पुनः बहाल करने हेतु समापक द्वारा की गई कार्यवाही के फलस्वरूप राजस्व मण्डल राजस्थान अजमेर में विचाराधीन एल.आर. 1997/2015 तथा 2001/2015 आंशिक रूप से समिति के पक्ष में निर्धारित हुई है। राजस्व मण्डल द्वारा 6 बिन्दु निर्धारित कर संभागीय आयुक्त को विनिश्चय हेतु प्रति प्रेषित किया गया। जो संभागीय आयुक्त जयपुर के न्यायालय में अपील संख्या 451/2016 व 452/2016 पर विचाराधीन है। इस प्रकरण सहित लगभग 25 न्यायिक प्रकरणों के निस्तारण पश्चात ही आगामी नियमन की कार्यवाही संभव हो पाएगी।
 
 
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