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राज्य के विकास में नाबार्ड का महत्वपूर्ण योगदान पुनर्वित्त की सीमा को 55-60 प्रतिशत तक बढ़ाएं -सहकारिता मंत्री
जयपुर, 8 फरवरी। सहकारिता एवं गोपालन मंत्री श्री अजय सिंह किलक ने कहा है कि किसानों की आय को 2022 तक दुगुनी करने के लिए राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नीतियां तैयार करने की आवश्यगकता है ताकि उपलब्ध संसाधनों के आधार पर ग्रामीण क्षेत्र में विकास को गति प्रदान की जा सके। श्री किलक गुरूवार को नाबार्ड, जयपुर द्वारा स्टेट फोकस पेपर 2018-19 को जारी करने के अवसर पर राज्य स्तरीय ऋण संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान की अर्थव्यवस्था कृषि एवं पशुपालन पर आधारित है और यहां जल की बहुत कमी है। हमें इन सब बातों का ध्यान रखते हुए किसान की उन्नति के लिए योजनाएं बनानी चाहिए। सहकारिता मंत्री ने राज्य की ग्रामीण आर्थिक गतिविधियों की दक्षता का व्यापक दस्तावेज तैयार करने में नाबार्ड के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि यह दस्तावेज राज्य के विकास की दिशा एवं गति को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने राज्य में कृषि क्षेत्र में पूंजी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए नाबार्ड द्वारा क्षेत्र आधारित योजनाओं को जारी करते हुए कहा कि इस वर्ष की राज्य ऋण योजना में जल संरक्षण को बढ़ावा दिया गया है ताकि राज्य के जल संसाधनों का अधिक से अधिक सदुपयोग हो सके और प्रत्येक बूंद से अधिक फसल प्राप्त करने के लिए प्रयास किए जा सके। सहकारिता मंत्री ने कहा कि हमें किसान को अन्न उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण उद्योग से भी जोड़ना होगा ताकि किसान की आय में बढ़ोतरी हो सके। उन्होंने कहा कि नाबार्ड ने राज्य के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और ग्रामीण क्षेत्र में विकास को गति प्रदान करने के लिए नाबार्ड को सहकारी बैंकों अल्पकालीन ऋण व्यवसाय में पुनर्वित्त की सीमा को 55-60 प्रतिशत तक बढ़ाना चाहिए ताकि किसानों को अधिक मात्रा में ब्याज रहित फसली ऋण की सुविधा मिल सके। उन्होंने कहा कि नाबार्ड पशुपालकों को कम ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराएं, पुराने नियमों में संशोधन कर उनका सरलीकरण करें, महिलाओं को सशक्त करने के लिए स्वयं सहायता समूहों को ज्यादा से ज्यादा ऋण उपलब्ध कराएं। उन्होंने बैंक प्रतिनिधियों को कहा कि व्यापार के साथ व्यवहार पर भी फोकस करें क्योंकि विकास सभी के सार्थक प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्रीमती वसुन्धरा राजे की किसानों के प्रति संवेदनशील है और इसी कारण प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक किसानों को दीर्घ कालीन कृषि ऋण 5.50 प्रतिशत की दर पर उपलब्ध करा रहे हैं, जबकि कोई भी वाणिज्यिक बैंक इस दर पर किसानों को ऋण उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव, ग्रामीण एवं पंचायतीराज विभाग श्री सुदर्शन सेठी ने कहा कि क्रेडिट प्लान को मूल भावना से लागू करेंगे तो राजस्थान प्रगतिषीलता के साथ आगे बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि एसएचजी को दिए गए ऋणों की रिकवरी 96 प्रतिशत के ऊपर होती है ऐसे में बैंकों का पैसा भी सुरक्षित रहता है। अतः एसएचजी को ऋण मुहैया कराने में आनाकानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजस्थान में 1 लाख 82 हजार घरों का निर्माण प्रधानमंत्री आवास योजना में किया जा चुका है और प्रदेश के 1953 ग्राम पंचायतों को गरीबी मुक्त करने का कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि सभी की भागीदारी एवं समन्वय के साथ अतिरिक्त ऊर्जा का इस्तेमाल करते हुए सार्वभौमिक विकास की ओर बढ़ा जा सकता है और आज राजीविका परिषद् को लगभग 400 करोड़ रुपए से बैंक से लिंक किया गया है। हमारा टारगेट रहेगा कि इसे 2 हजार करोड़ रुपए तक लाया जाए। मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड जयपुर श्री ए के सिंह ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए बैंकों द्वारा प्राथमिकता क्षेत्र को ऋण देने हेतु 1.84 लाख करोड़ रुपए के ऋण की संभाव्यता का अनुमान लगाया गया है। जिसमें से कृषि क्षेत्र हेतु 1.28 लाख करोड़ रुपए, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम हेतु 32 हजार 263 करोड़ रुपए, निर्यात क्षेत्र के लिए 2094 करोड़ रुपए, आवास ऋण हेतु 10460 करोड़ रुपए, नवीकरणीय उर्जा हेतु 1020 करोड़ रुपए,सामाजिक बुनियादी ढांचे के लिए 1306 करोड़ रुपए व अन्य प्रयोजनों हेतु 5509 करोड़ रुपए की आवश्यीकता होने का अनुमान है। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि सहकारिता मंत्री श्री अजय सिंह किलक ने स्टेट फोकस पेपर 2018-19 एवं क्षेत्र विकास योजना 2018-23 का विमोचन किया। कार्यक्रम में प्रमुख शासन सचिव, सार्वजनिक निर्माण विभाग श्री आलोक गुप्ता, राजफैड की प्रबंध निदेशक डॉ. वीना प्रधान सहित भारतीय रिजर्व बैंक, सिडबी, ग्रामीण एवं वाणिज्यिक बैंकों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
 
 
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