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प्रदेश में मूंग और मूंगफली की होगी खरीद सहकारिता मंत्री की केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री के साथ बैठक
जयपुर, 8 सितम्बर। राज्य सरकार किसानों को उनकी दलहनी और तिलहनी फसलों का उचित मूल्य दिलवाने के लिए केन्द्र सरकार की नोडल एजेंसी नेफेड के माध्यम से पी एस एस योजना के तहत शीघ्र ही मूंग और मूंगफली की खरीददारी करवाएगी। इसके लिए सहकारिता विभाग की राजफैड प्रदेश की नोडल एजेंसी होगी। केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री श्री सी आर चौधरी के साथ शुक्रवार को नई दिल्ली के कृषि भवन में सहकारिता मंत्री श्री अजय सिंह किलक की बैठक में यह फैसला हुआ। इसके लिए पी एस एफ स्कीम के तरह राजफैड को एक रिवॉल्विंग फण्ड बनाना होगा और राज्य सरकार को कृषि मंडी टैक्स को हटाने की सहमति देनी होगी। बैठक में केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण तथा कृषि मंत्रालय के साथ ही नेफेड और राजफैड के वरिष्ठ अधिकारियाें ने भाग लिया। केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री श्री सी आर चौधरी ने बताया कि भारत सरकार ने इस वर्ष मूँगफली का समर्थन मूल्य 4450 रु प्रति क्विंटल घोषित किया है। जिसमें 200 रु बोनस शामिल है। इसी प्रकार मूंग का समर्थन मूल्य 5575 रु प्रति क्विंटल तय हुआ है। जी कि गत वर्ष की तुलना में अधिक है। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष भी राजस्थान से सबसे अधिक 1.90 लाख मैट्रिक टन मूंग की खरीद करवा किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलवाने में मदद की थी। श्री अजय सिंह किलक ने बताया कि मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे प्रदेश के किसानों को उनकी उपज की वाजिब कीमत दिलवाने के लिए बहुत चिंतित है। उन्होंने बताया कि मंडी टैक्स आदि पर मुख्यमंत्री से उचित निर्णय करवा राजस्थान सरकार आगामी एक अक्टूबर से मूंग और मूंगफली की खरीद शुरू करवाना चाहती है।इसके लिए पिछली बार की तरह ही इस बार भी 70-72 खरीद केन्द्र बनाये जायेंगे। उन्होंने बताया कि इस बार किसानों की सुविधा के लिए सहकारिता विभाग ने एक सोफ्टवेयर भी बनाया है, जिस पर किसान अपनी फसल की बिक्री के लिए ई मित्र केन्द्रों के द्वारा ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। तदनुरूप किसानों की सुविधा के अनुसार उन्हें एस एमएस द्वारा खरीद की तिथि की सूचना भिजवाई जाएगी। काश्तकारों को अपने साथ गिरदावरी की रिपोर्ट और भामाशाह कार्ड की प्रति लानी होगी। किसानों की फसल का तय मूल्य उनके बैंक खाते में सीधा ट्रांसफर होगा। खरीद केन्द्रों पर फसल की गुणवत्ता की जाँच के लिए नैफेड के प्रतिनिधि मौजूद रहेगे। खरीद का काम तीन माह तक चलेगा।
 
 
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