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सहकारिता राज्यमंत्री ने केन्द्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामलात राज्यमंत्री को लिखा पत्र मूंग खरीद की अवधि एक माह बढ़ाने के लिए किया आग्रह मूंग बेचने के लिए अभी भी आ रहे हैं किसान खरीद केंद्रों पर
जयपुर, 8 दिसम्बर। सहकारिता राज्यमंत्री श्री अजय सिंह किलक ने गुरुवार को केन्द्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामलात राज्यमंत्री श्री सी. आर. चौधरी को पत्र लिखकर केन्द्र द्वारा राज्य में समर्थन मूल्य पर की जा रही मूंग की खरीद की अवधि एक माह बढ़ाकर 14 जनवरी, 2017 तक करने के लिए आग्रह किया है। सहकारिता राज्य मंत्री ने बताया कि इस संदर्भ में केन्द्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, उपभोक्ता मामलात राज्यमंत्री श्री सी.आर. चौधरी को दूरभाष पर परिस्थितियों से अवगत करा दिया गया है। श्री किलक ने पत्र में लिखा है कि मूंग खरीद की समीक्षा एवं राज्य के विभिन्न जिलों के दौरे के दौरान यह ध्यान में आया है कि राज्य में अब तक 69,965.77 मैट्रिक टन मूंग की खरीद विभिन्न एजेन्सियों द्वारा की गई है। जबकि राज्य में मूंग की बम्पर पैदावार हुई है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि राज्य में सर्दी के मौसम की शुरूआत हो चुकी है, कोहरा पढना प्रारम्भ हो गया है तथा किसान खरीद केन्द्रों पर अपनी मूंग की उपज को बेचने के लिए कतार लगाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए मेरे द्वारा अधिकारियों को निर्देष दिए गए है कि किसानों से अधिक से अधिक मात्रा में मूंग की खरीद सुनिष्चित की जाए। एम.डी. राजफैड को भी खरीद केन्द्रों पर देर रात तक खरीद करने, अवकाश के दिनों में भी खरीद जारी रखने तथा तौल कांटों की संख्या बढ़ाए जाने के निर्देष दिए गए हैं। राजफैड द्वारा उक्त सभी उपाय कर दिए जाने के बावजूद भी खरीद केंद्रों पर किसानों की कतार कम नहीं हो रही है। श्री किलक ने चिन्ता जाहिर करते हुए लिखा कि खरीद केन्द्रों पर अपनी उपज मंूग को नहीं बेच पाने एवं समर्थन मूल्य पर खरीद प्रक्रिया के अवधि कम शेष रहने के कारण किसानों को हताषा में औने-पोने दामों में बेचने को मजबूर न होना पड़े। सहकारिता राज्यमंत्री ने केन्द्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता राज्यमंत्री से अनुरोध किया है कि समर्थन मूल्य पर की जा रही मूंग खरीद प्रक्रिया को 14 जनवरी, 2017 तक बढ़ाए जाने के लिए सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिये जायें ताकि राजस्थान के किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। किसान कम मूल्य पर फसल बेचने को मजबूर नहीं हो सके और काश्तकार को राहत मिल सके।
 
 
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