मुख पृष्ठ
Home
 
किसान ऋण अदायगी के लिए कर रहे हैं चैक का उपयोग एक करोड़ की राशि भूमि विकास बैंकों में हुई जमा
जयपुर, 28 नवम्बर। सरकार की ओर से 500 एवं 1000 रूपए के पुराने नोटों की नोटबंदी का फरमान। किसानों के लिए सहकारी भूमि विकास बैंकों में समय पर ऋण जमा करने की चुनौती और इन सबके बीच में सहकारी भूमि विकास बैंकों को अपना अस्तित्व बनाए रखने की चिंता। इन समस्याओं के मद्देनजर सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार एवं शासन सचिव श्री अभय कुमार ने 23 नवम्बर को राज्य के सभी प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों के सचिवों की बैठक बुलाई। जिसका नतीजा यह रहा कि 28 नवम्बर तक प्रदेश के भूमि विकास बैंकों में किसानों द्वारा लगभग 1 करोड रूपए की ऋण अदायगी केवल चैक से की जा चुकी है। श्री कुमार ने प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों के सचिवों को उक्त विपरीत परिस्थितियों को चुनौती के रूप में स्वीकार करने तथा भारत सरकार की डिमोनेटाईजेशन की योजना के मद्देनजर किसानों को कैशलेस रिकवरी जमा कराने के लिए प्रोत्साहित करने का आह्वान किया था। उन्होंने निर्देश दिए थे कि किसानों से सीधा संपर्क कर उन्हें डिमोनेटाईजेशन के फायदे समझाएं एवं किसानों को अपनी जमाओं को राष्ट्रीकृत बैंकों के बचत खातों में जमा कर चैक/आर.टी.जी.एस./एन.ई.एफ.टी./पे-ऑर्डर/मोबाईल बैंकिंग आदि के माध्यम से अपने भुगतान करने के लिए प्रोत्साहित करें। रजिस्ट्रार एवं शासन सचिव, सहकारिता के निर्देशों को अधिकारियों ने चुनौती के रूप में लेते हुए अपने कार्य को अंजाम देना शुरू किया। अब बैंक किसानों से व्यक्तिगत संपर्क कर उन्हें जागरूक कर रहे हैं एवं पम्पलेट्स के द्वारा शिक्षित किया जा रहा है। जिन किसानों के बैंक खाते राष्ट्रीकृत बैंकों में नहीं हैं, उनके खाते खुलवाए जा रहे हैं। जिसका परिणाम यह रहा कि अल्प अवधि में प्रदेश के प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों के खातों में चैक के द्वारा लगभग एक करोड़ रूपए की ऋण राशि किसानों ने जमा कराई है। राजस्थान राज्य भूमि विकास बैंक के प्रबंध निदेशक श्री विजय शर्मा इन सब प्रयासों को सफलीभूत करने के लिए लगातार मोनेटरिंग कर रहे हैं। इन प्रयासों के फलस्वरूप प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंकों जिनमें राजसमंद में 30.69 लाख, रायसिंह नगर में 8.34 लाख, बिलाडा में 7.79 लाख, जयपुर में 7.58 लाख, चित्तौडगढ में 6.93 लाख, केकडी में 4.65 लाख, जैसलमेर में 3.36 लाख, बालोतरा में 3.16 लाख रूपए एवं अन्य प्राथमिक सहकारी बैंकों में लगभग एक करोड रूपए की ऋण राशि का भुगतान किसानों ने चैक द्वारा किया है, जो राज्य के किसानों द्वारा विपरीत परिस्थितियों में सहकारिता में विश्वा्स को प्रकट करता है। किसानों को जागरूक एवं शिक्षित करने का यह तरीका कारगर साबित होता दिख रहा है और अब काश्तकार भी नई तकनीक के साथ सामंजस्य स्थापित कर रहा है।
 
 
Site designed & hosted by National Informatics Centre.
Contents provided by Department of Cooperation, Govt. of Rajasthan.